Pages

Thursday, June 24, 2010

आदमी और साँप में कौन ज़्यादा ज़हरीला होता है?

चिट्ठाजगत अधिकृत कड़ी

'इच्छाधरी नाग' कितने रूप बदल सकते हैं?
क्या किसी सिद्धि के द्वारा इच्छाधरी नाग को गुलाम बनाया जा सकता है?
क्या विषकन्याएँ सचमुच सॉपों से भी ज़हरीला होती हैं?
'नागमणि' के द्वारा कौन-कौन से चमत्कार सम्भव हैं?
सबसे ज़हरीला साँप कौन सा होता है?
साँप काटने पर कौन सा मंत्र प्रयोग में लाया जाता है?
क्या साँप के ज़हर को चूसने वाली कोई जड़ी भारत में पाई जाती है?
क्या साँप अपनी आँखों में कातिल की फोटो कैद कर लेता है?

ऐसे ही बहुत से सवाल हैं, जो अक्सर हमारे दिमाग में कौंधते रहते हैं। लेकिन हमें कोई ऐसा व्यक्ति नहीं मिल पाता है, जो इस सम्बंध में प्रामाणिक जानकारी दे सके। नतीजतन इधर उधर से मिला आधा-अधूरा ज्ञान लोगों के मन में बचपन से जमे अंधविश्वास की पर्तों को और मोटा करता जाता है।

सम्भवत: भारत में साँपों से जुड़े जितने मिथक और अंधविश्वास प्रचलित हैं, उतने किसी अन्य देश में नहीं। यही कारण है कि एक ओर जहाँ साँप हमारे लिए पूज्यनीय हैं, वहीं दूसरी ओर वे हमारे मस्तिष्क में 'देखते ही मार देने वाले' जीव के रूप में जगह बनाए हुए हैं। इसके पीछे कारण है सिर्फ और सिर्फ साँपों के बारे में प्रचलित मिथ्या धारणाएँ और उनसे जुड़ी हमारी अज्ञानता। 'सर्प संसार' जन समुदाय में प्रचलित इसी अज्ञानता को दूर करने का एक विनम्र प्रयास है।

'सर्प संसार' को शुरू करने के पीछे हमारा उद्देश्य है साँपों से सम्बंधित रहस्यों से पर्दा उठाना और उनसे जुड़े अन्धविश्वास को दूर करना। इस ब्लॉग के द्वारा साँपों से जुड़ी सभी तरह की जिज्ञासाओं का समाधान किया जाएगा और पाठकों को विशेषज्ञ लेखकों के द्वारा उचित जानकारी प्रदान की जाएगी। इस सम्बंध में आप अपने प्रश्न/जिज्ञासाएँ टिप्पणी के द्वारा अथवा sarpsansar@gmail.com पर मेल भेज कर भी पूछ सकते हैं।

हमें आशा ही नहीं बल्कि पूर्ण विश्वास है संवाद समूह के इस प्रयास को भी 'तस्लीम' और 'साइंस ब्लॉगर्स असोसिएशन' की तरह आपका स्नेह प्राप्त होगा।

..और अंत में एक बौद्धिक सवाल- आदमी और साँप में कौन ज़्यादा ज़हरीला होता है? बताइएगा ज़रूर।

अगर आपको 'सर्प संसार' का यह प्रयास पसंद आया हो, तो कृपया फॉलोअर बन कर हमारा उत्साह अवश्य बढ़ाएँ।

55 comments:

'उदय' said...

...बेहतरीन!!!

डॉ टी एस दराल said...

कवि नीरज ने कहा है --सर्प तो सर्प है , भले ही मणि हो उसके पास ।
इंसानों में भी सर्प मिलते हैं ।

सुलभ § Sulabh said...

बहुत अच्छा प्रयास है
लीजिये शामिल हो गए हम

Dr.Ajmal Khan said...

insaan zyada zahreela hoota hai,lakin uski funkaar meethi hoti hai,aur uska katna adryshya .

अन्तर सोहिल said...

बढिया प्रयास है जी
अंधविश्वास से जुडे मि्थकों को दूर करने के लिये सराहनीय कार्य के लिये बधाई

प्रणाम

अजय कुमार झा said...

दोनों में से कौन ज्यादा जहरीला है ये पता लगाते हैं रुकिए पहले ये जान लीजीए कि अंतिम फ़ोटो वाली लडकी सांप को जिंदा खाने के मूड में है जबकि इसको फ़्राई तो करके खाने से ज्यादा स्वाद आना चाहिए था . ऐसा ...बस ..just a guess है ।

प्रश्न हम मेल करेंगे आपको जल्दी ही

JC said...

hindumanyatanusar 'saas bhi kabhi bahu thi' jaise har aadmi bhi pahle kabhi kaal-chakra mein saanp bhi raha tha, jis kaaran uske bheetar sabhi praneeyon ke gun hain... aur har saanp zahreela naheen hota,,, balki bahut thode hi zahreele hote hain...

zeashan zaidi said...

"आदमी और साँप में कौन ज़्यादा ज़हरीला होता ?"
ये तो नीचे वाली तस्वीर ही से स्पष्ट हो रहा है.

Archana said...

अभी तक तो सब सांपों से घिरी हूँ..........आदमी से मिलूँ ....तो बता पाउंगी ..........
आधे-अधूरे ज्ञान .........और अंधविश्वास को दूर करने की दिशा मे उठे कदम का साथ देंगे हम ........

सलीम ख़ान said...

are waah to aapne yah shuru kar diya udhar meree ek post saanpon par hi science bloggers aso. par aane wali hai...

great !!!

bahut bahut badhaee !!!

ss.samwaad.com kii team ko meree shubhkamnayen!!

ss means sarp sansaar
ss means swachchh sandesh

ha ha

bahut bahut shukriya is tarah ke blog ko banane ke liye !!!

मनोज कुमार said...

दोनों में से कौन ज्यादा जहरीला है ...
अज्ञेय जी की कविता याद आ गई।

Mahak said...

अंधविश्वास से जुडे मि्थकों को दूर करने के सराहनीय कार्य के लिये बधाई
लीजिये शामिल हो गए हम भी

बेचैन आत्मा said...

स्वागत है आपका. इस ब्लॉग पर हमारी नजर रहेगी. निसंदेह यह एक सराहनीय प्रयास है.

रजनी नैय्यर मल्होत्रा said...

आपने पूछा आदमी और साँप में ज्यादा जहरीला कौन होता है .मेरे नज़र से आदमी ज्यादा जहरीला होता है क्योंकि साँप की फितरत होती है विष देना ,उसे हर कोई जानता है ये विषधर है कभी भी डस लेगा .पर, आदमी तो आस्तीन में पल कर कब डस ले कोई नहीं जानता ,isiliye आदमी को ज्यादा जहरीला मानती हूँ साँप से .

निर्मला कपिला said...

"आदमी और साँप में कौन ज़्यादा ज़हरीला होता ?"
मुझे तो आदमी अधिक जहरीला लगता है। एक सच्ची घतना सुनाती हूँ\
एक बार हमारे अस्पताल की एक डाक्टर--नाम क रख लेती हूँ असली नाम लिया तो वो मुझे ही डस लेगी} को साँप ने काट लिया जल्दी से उपचार शुरू हुया। सभी डाक्टर उनकी खबर लेने गयी।अगले दिन काफी रूम मे इस पर बात होने लगी तो एक दाक्टर जो बहुत मजाकिया हैं पूछने लगी कि आप सब ने " क" डाक्टर की खबर तो ले ली क्या उस साँप की खबर भी ली है जिस ने "क" को काटा।"क" का रेपुटेशन कुछ इस तरह ही था। अब आप समझ लें वो डाक्टर तो ठीक है साँप का पता नही। धन्यवाद

नीरज गोस्वामी said...

आपका ये सांपो को समर्पित ब्लॉग स्तुत्य है...मुझे यकीन है आप का ये प्रयास साँपों के प्रति हमारी प्रचलित धारणाओं को जरूर तोड़ेगा...आपके अंतिम सवाल के उत्तर में अपना एक शेर पेश करता हूँ:

साँप से बेकार ही में डर रहा है आदमी
काटने से आदमी के मर रहा है आदमी

नीरज

डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर said...

sarp ke kaate ka ilaaz hai par aadami ke kaate ka??????????

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

इसके माध्यम से नयी जानकारी मिलेगी..ऐसी आशा है...अच्छा प्रयास...और ज़हरीला ज्यादा कौन...तो ये वक्त वक्त की बात है...कब किसका ज़हर ज्यादा चढ़ता है ??????

अजय कुमार said...

हिंदी ब्लाग लेखन के लिए स्वागत और बधाई
कृपया अन्य ब्लॉगों को भी पढें और अपनी बहुमूल्य टिप्पणियां देनें का कष्ट करें

नन्हीं लेखिका - Rashmi Swaroop said...

Beshak insaan hi adik vishaila hai... :)

It gonna be my favorite blog soon.. becuz I love reptiles !! wierdo.. but I do !

good luck...

Udan Tashtari said...

स्वागतम!! उम्दा प्रयास!!

P.N. Subramanian said...

स्वागत योग्य. "भारतीय भुजंग" ने बहुत कुछ बताया है. परन्तु आजकल सुसुप्त अवस्था में है.

संगीता पुरी said...

बहुत ही अच्‍छा प्रयास .. इस ब्‍लॉग के साथ आपका स्‍वागत है !!

शिवम् मिश्रा said...

बढ़िया लगा आपका यह प्रयास ! शुभकामनाएं !
बाकी नीरज जी से सहमत हूँ !

E-Guru Rajeev said...

हा हा हा
उत्तम प्रयास.
अंतिम फोटो मजेदार है.

E-Guru Rajeev said...

हिन्दी ब्लॉगजगत के स्नेही परिवार में इस नये ब्लॉग का और आपका मैं ई-गुरु राजीव हार्दिक स्वागत करता हूँ.

मेरी इच्छा है कि आपका यह ब्लॉग सफलता की नई-नई ऊँचाइयों को छुए. यह ब्लॉग प्रेरणादायी और लोकप्रिय बने.

यदि कोई सहायता चाहिए तो खुलकर पूछें यहाँ सभी आपकी सहायता के लिए तैयार हैं.

शुभकामनाएं !


"टेक टब" - ( आओ सीखें ब्लॉग बनाना, सजाना और ब्लॉग से कमाना )

E-Guru Rajeev said...

आपका लेख पढ़कर हम और अन्य ब्लॉगर्स बार-बार तारीफ़ करना चाहेंगे पर ये वर्ड वेरिफिकेशन (Word Verification) बीच में दीवार बन जाता है.
आप यदि इसे कृपा करके हटा दें, तो हमारे लिए आपकी तारीफ़ करना आसान हो जायेगा.
इसके लिए आप अपने ब्लॉग के डैशबोर्ड (dashboard) में जाएँ, फ़िर settings, फ़िर comments, फ़िर { Show word verification for comments? } नीचे से तीसरा प्रश्न है ,
उसमें 'yes' पर tick है, उसे आप 'no' कर दें और नीचे का लाल बटन 'save settings' क्लिक कर दें. बस काम हो गया.
आप भी न, एकदम्मे स्मार्ट हो.
और भी खेल-तमाशे सीखें सिर्फ़ "टेक टब" (Tek Tub) पर.
यदि फ़िर भी कोई समस्या हो तो यह लेख देखें -


वर्ड वेरिफिकेशन क्या है और कैसे हटायें ?

shikha varshney said...

फोलोअर तो बन गए हैं पर ब्लॉग खुलेगा ही इसकी गारंटी नहीं है :) I will keep my finger cross .

डॉ. पुरुषोत्तम मीणा निरंकुश, सम्पादक-प्रेसपालिका (पाक्षिक), जयपुर (राजस्थान) और राष्ट्रीय अध्यक्ष-बास/ Dr. Purushottam Meena Nirankush, Editor PRESSPALIKA,(Fortnightly) Jaipur, Raj. and N. P.-BAAS said...

जिन्दा लोगों की तलाश!
मर्जी आपकी, आग्रह हमारा!!


काले अंग्रेजों के विरुद्ध जारी संघर्ष को आगे बढाने के लिये, यह टिप्पणी प्रदर्शित होती रहे, आपका इतना सहयोग मिल सके तो भी कम नहीं होगा।
=0=0=0=0=0=0=0=0=0=0=0=0=0=0=0=0=

सच में इस देश को जिन्दा लोगों की तलाश है। सागर की तलाश में हम सिर्फ बूंद मात्र हैं, लेकिन सागर बूंद को नकार नहीं सकता। बूंद के बिना सागर को कोई फर्क नहीं पडता हो, लेकिन बूंद का सागर के बिना कोई अस्तित्व नहीं है। सागर में मिलन की दुरूह राह में आप सहित प्रत्येक संवेदनशील व्यक्ति का सहयोग जरूरी है। यदि यह टिप्पणी प्रदर्शित होगी तो विचार की यात्रा में आप भी सारथी बन जायेंगे।

हमें ऐसे जिन्दा लोगों की तलाश हैं, जिनके दिल में भगत सिंह जैसा जज्बा तो हो, लेकिन इस जज्बे की आग से अपने आपको जलने से बचाने की समझ भी हो, क्योंकि जोश में भगत सिंह ने यही नासमझी की थी। जिसका दुःख आने वाली पीढियों को सदैव सताता रहेगा। गौरे अंग्रेजों के खिलाफ भगत सिंह, सुभाष चन्द्र बोस, असफाकउल्लाह खाँ, चन्द्र शेखर आजाद जैसे असंख्य आजादी के दीवानों की भांति अलख जगाने वाले समर्पित और जिन्दादिल लोगों की आज के काले अंग्रेजों के आतंक के खिलाफ बुद्धिमतापूर्ण तरीके से लडने हेतु तलाश है।

इस देश में कानून का संरक्षण प्राप्त गुण्डों का राज कायम हो चुका है। सरकार द्वारा देश का विकास एवं उत्थान करने व जवाबदेह प्रशासनिक ढांचा खडा करने के लिये, हमसे हजारों तरीकों से टेक्स वूसला जाता है, लेकिन राजनेताओं के साथ-साथ अफसरशाही ने इस देश को खोखला और लोकतन्त्र को पंगु बना दिया गया है।

अफसर, जिन्हें संविधान में लोक सेवक (जनता के नौकर) कहा गया है, हकीकत में जनता के स्वामी बन बैठे हैं। सरकारी धन को डकारना और जनता पर अत्याचार करना इन्होंने कानूनी अधिकार समझ लिया है। कुछ स्वार्थी लोग इनका साथ देकर देश की अस्सी प्रतिशत जनता का कदम-कदम पर शोषण एवं तिरस्कार कर रहे हैं।

आज देश में भूख, चोरी, डकैती, मिलावट, जासूसी, नक्सलवाद, कालाबाजारी, मंहगाई आदि जो कुछ भी गैर-कानूनी ताण्डव हो रहा है, उसका सबसे बडा कारण है, भ्रष्ट एवं बेलगाम अफसरशाही द्वारा सत्ता का मनमाना दुरुपयोग करके भी कानून के शिकंजे बच निकलना।

शहीद-ए-आजम भगत सिंह के आदर्शों को सामने रखकर 1993 में स्थापित-भ्रष्टाचार एवं अत्याचार अन्वेषण संस्थान (बास)-के 17 राज्यों में सेवारत 4300 से अधिक रजिस्टर्ड आजीवन सदस्यों की ओर से दूसरा सवाल-

सरकारी कुर्सी पर बैठकर, भेदभाव, मनमानी, भ्रष्टाचार, अत्याचार, शोषण और गैर-कानूनी काम करने वाले लोक सेवकों को भारतीय दण्ड विधानों के तहत कठोर सजा नहीं मिलने के कारण आम व्यक्ति की प्रगति में रुकावट एवं देश की एकता, शान्ति, सम्प्रभुता और धर्म-निरपेक्षता को लगातार खतरा पैदा हो रहा है! अब हम स्वयं से पूछें कि-हम हमारे इन नौकरों (लोक सेवकों) को यों हीं कब तक सहते रहेंगे?

जो भी व्यक्ति इस जनान्दोलन से जुडना चाहें, उसका स्वागत है और निःशुल्क सदस्यता फार्म प्राप्ति हेतु लिखें :-

(सीधे नहीं जुड़ सकने वाले मित्रजन भ्रष्टाचार एवं अत्याचार से बचाव तथा निवारण हेतु उपयोगी कानूनी जानकारी/सुझाव भेज कर सहयोग कर सकते हैं)

डॉ. पुरुषोत्तम मीणा
राष्ट्रीय अध्यक्ष
भ्रष्टाचार एवं अत्याचार अन्वेषण संस्थान (बास)
राष्ट्रीय अध्यक्ष का कार्यालय
7, तँवर कॉलोनी, खातीपुरा रोड, जयपुर-302006 (राजस्थान)
फोन : 0141-2222225 (सायं : 7 से 8) मो. 098285-02666

E-mail : dr.purushottammeena@yahoo.in

hem pandey said...

ब्लॉगजगत में इससे पूर्व भी साँपों के बारे में जानकारी वाले ब्लॉग उपलब्ध हैं. इस नए ब्लॉग से और अधिक जानकारी की अपेक्षा रहेगी.
मनुष्य के जहरीलेपन के सन्दर्भ में अज्ञेय जी की इन पंक्तियों का जायजा लीजिये -
Snake, you were never civilized,
And you never learned
How to live in the city.
I'd like to ask. hoping you will answer -
Then how did you learn to bite
Where did you get the poison.

रौशन जसवाल विक्षिप्त said...

nice

Darshan Lal Baweja said...

एक बौद्धिक सवालहै तो आदमी
और वैज्ञानिक सवाल है तो साप
शुभकामनायें

ajit gupta said...

हम आदमी को कितना ही जहरीला बता लें लेकिन साक्षात मृत्‍यु का भय तो साँप से ही लगता है इसलिए ही उसे पूर्व में पूजा जाता था और बाद में मारा जाने लगा।

Vinay Prajapati 'Nazar' said...

wow wonderful post

---
http://petalsoftime.tumblr.com/

Voice Of The People said...

सांप अपने बचाओ मैं काट ता है, इंसान लालच मैं काट लेता है.

संजीव तिवारी .. Sanjeeva Tiwari said...

स्‍वागत.

(विमर्श से निर्णय स्‍पष्‍ट हो चुका है इस कारण मुझ नाचीज को इतना ही कहना है)

सूर्यकान्त गुप्ता said...

इस जगत मे मिथ्या धारणा को मिटाना है। स्वागत! बधाई!

Vivek Rastogi said...

बहुत स्वागत आपका, एक नये विषय ब्लॉग के लिये

वित्तीय स्वतंत्रता पाने के लिये ७ महत्वपूर्ण विशेष बातें [Important things to get financial freedom…]

Dr. shyam gupta said...

एक नव-अगीत....

मनुष्य,
इतना जहरीला होगया है,
सांप,
अब आस्तीन में नहीं रहते ।

और एक दोहा....

सांप सोचता, देखकर, जहरीला इन्सान ।
दो पैरों का सांप यह, कैसा है भगवान ॥

Kunnu said...

Are waah, ye to bahut sundar prayas hai. Badhayi sweekaaren.

राजकुमार जैन 'राजन' said...

बहुत ही अच्छा काम कर रहे हैं आप लोग, इसके लिए बधाई।

खुशदीप सहगल said...

आदमी आदमी को डस रहा है,
सांप साइड में खड़ा हंस रहा है...

जय हिंद...

Archana said...

यू -ट्यूब पर एक विडियो देखा सोचा आपको भेज दूं ...........मेल किया है ........

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ said...

'सर्प संसार'के सम्बंध में आप सबकी शुभकामनाओं के लिए हार्दिक आभार। हमारी कोशिश रहेगी कि हम आपकी आशाओं पर खरे उतरें।
आशा है, आपका यह स्नेह हमेशा बना रहेगा।

usha rai said...

जाकिर साहेब आप महान हैं ! व्यंग्य के आखिरी छोर तक पहुँच जाते हैं ! नये प्रयोग के लिए बधाई !

सुमन कुमार said...

खो गई है
मेरी कविता
पिछले दो दशको से.
वह देखने में, जनपक्षीय है
कंटीला चेहरा है उसका
जो चुभता है,
शोषको को.
गठीला बदन,
हैसियत रखता है
प्रतिरोध की.
उसका रंग लाल है
वह गई थी मांगने हक़,
गरीबों का.
फिर वापस नहीं लौटी,
आज तक.
मुझे शक है प्रकाशकों के ऊपर,
शायद,
हत्या करवाया गया है
सुपारी देकर.
या फिर पूंजीपतियो द्वारा
सामूहिक वलात्कार कर,
झोक दी गई है
लोहा गलाने की
भट्ठी में.
कहाँ-कहाँ नहीं ढूंढा उसे
शहर में....
गावों में...
खेतों में..
और वादिओं में.....
ऐसा लगता है मुझे
मिटा दिया गया है,
उसका बजूद
समाज के ठीकेदारों द्वारा
अपने हित में.
फिर भी विश्वास है
लौटेगी एक दिन
मेरी खोई हुई
कविता.
क्योंकि नहीं मिला है
हक़.....
गरीबों का.
हाँ देखना तुम
वह लौटेगी वापस एक दिन,
लाल झंडे के निचे
संगठित मजदूरों के बिच,
दिलाने के लिए
उनका हक़.

अबयज़ ख़ान said...

वाह.. जानकारी का भरपूर ख़ज़ाना है..

Akshita (Pakhi) said...

अच्छी जानकारी...मजा आ गया पढ़कर.


***************************
'पाखी की दुनिया' में इस बार 'कीचड़ फेंकने वाले ज्वालामुखी' !

उन्मुक्त said...

अच्छा प्रयास है।

जयराम “विप्लव” { jayram"viplav" } said...

" बाज़ार के बिस्तर पर स्खलित ज्ञान कभी क्रांति का जनक नहीं हो सकता "

हिंदी चिट्ठाकारी की सरस और रहस्यमई दुनिया में राज-समाज और जन की आवाज "जनोक्ति.कॉम "आपके इस सुन्दर चिट्ठे का स्वागत करता है . चिट्ठे की सार्थकता को बनाये रखें . अपने राजनैतिक , सामाजिक , आर्थिक , सांस्कृतिक और मीडिया से जुडे आलेख , कविता , कहानियां , व्यंग आदि जनोक्ति पर पोस्ट करने के लिए नीचे दिए गये लिंक पर जाकर रजिस्टर करें . http://www.janokti.com/wp-login.php?action=register,
जनोक्ति.कॉम www.janokti.com एक ऐसा हिंदी वेब पोर्टल है जो राज और समाज से जुडे विषयों पर जनपक्ष को पाठकों के सामने लाता है . हमारा प्रयास रोजाना 400 नये लोगों तक पहुँच रहा है . रोजाना नये-पुराने पाठकों की संख्या डेढ़ से दो हजार के बीच रहती है . 10 हजार के आस-पास पन्ने पढ़े जाते हैं . आप भी अपने कलम को अपना हथियार बनाइए और शामिल हो जाइए जनोक्ति परिवार में !

sandhyagupta said...

Meri or se dheron shubkamnayen.

Manoj Bijnori said...

ये अंध विस्वास को दूर करने के एक सार्थक प्रयास है.
लेकिन जाकिर जी आपकी एस पोस्ट से मुझे अपने गाँव में एक घटी घटना याद आ गयी.
हुआ यूं था कि हमारी साइड में लोगो का ये भी मानना है कि जो व्यक्ति साप के काटने से मर जाता है अगर उसका सपेरो को पता लग जाए. तो वो उसको जिन्दा भी कर लेते है . सी अंध विस्वास के चलते गाँव के एक व्यक्ति ने सपेरो के चक्कर में पदक्र अपने बेटे को जिन्दा करने के लिए बहुत पैसा गवा दिया पर कुछ नहीं हुआ.
आशा करता हु कि गाँव कि जनता एन अंध विश्वासों से दूर हो
आपका अपना
मनोज बिजनौरी

दिगम्बर नासवा said...

बहुत साँपों पे समर्पित ब्लॉग के लिए शुभकामनाएँ .... आशा है आयेज भी बहुत कुछ जानने को मिलेगा साँपों से बारे में .... बहुत से मिथ टूटेंगे लगता है ...

वाणी गीत said...

ज्यादा जहरीले तो इंसान ही होते होंगे ...सांप तो सामने इंसान मिल जाए या छेड़ा जाए तो डसते हैं ...और इंसान बेवजह सिर्फ अपने फायदे के लिए दूसरों को नुकसान पहुंचाते हैं ...

anjana said...

अच्छा प्रयास...